सोनभद्र शास्त्रों में
सोनभद्र शास्त्रों में रामनाथ शिवेंद्र मनु और सतरूपा को भारतीय समाज अपना जनक मानता है तथा इन्हें प्रमाणित रूप से शास्त्रों के द्वारा स्थापित भी किया गया है। पुराणों के कथाएं तथा मनुस्मृति दोनों ही ‘मन’ु को केन्द्र में रखकर महत्वपूर्ण ग्रन्थ की हैसियत में हैं। गीता, मनुस्मृति, वेद, हिन्दू आख्यानों के ऐसे दस्तावेज हैं जिन पर सार्थक व उपयोगी बहस करना हिन्दू होने के अस्वीकार से है यानि हिन्दू विरोधी होना है। जात-पांत वर्ण व्यवस्था ये कुछ ऐसे समाज विरोधी तत्व दर्शन हैं जो इतिहास की गतिशीलता को बाधित कर क्षयग्रस्त करते हैं। सभी जानते हैं कि शास्त्रों के संघातों को झेल पाना आसान नहीं होता। तभी तो इतिहासकार अबूतालिब ने कहा था...‘तुम इतिहास पर बन्दूक चलाओगे तो वह तुम पर तोप से गोले दागेगा’ हमें सदैव ध्यान रखना होगा कि शस्त्रों एवं शास्त्रों की द्वन्दात्मकता से उपजने वाला इतिहास अपने विमर्शो के माध्यम से ऐतिहासिक सत्य का अनुसंधान करे न कि उसका...